Sun. Jun 23rd, 2024

इस बार दलितों के वोट बैंक पर टिकी है भाजपा सहित कई पार्टियों की नजरें

भूदेव भगलिया, वरिष्ठ पत्रकार

भूदेव भगलिया, वरिष्ठ पत्रकार

ऐसी खबरें पढ़ने के लिये Group को Join करें
ऐसी खबरें पढ़ने के लिये Whatsapp Channel को Follow करें
ऐसी खबरें पढ़ने के लिये Group को Join करें

उत्तर प्रदेश में चुनावी ऐलान होने के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों ने अपने-अपने वर्गों ;9जाति को साधना शुरू कर दिया है।
प्रदेश में 21 प्रतिशत से अधिक दलित आबादी का यूपी की राजनीति में सदैव महत्वपूर्ण भूमिका रही है। लोकसभा का चुनाव हो या फिर विधानसभा का पिछले कई दशकों से दलित बहुजन समाज पार्टी के साथ खड़ा दिखाई देता रहा।

पिछले कुछ समय से दलित वोट भी अन्य पार्टी में जाना शुरू हो गया है। लोकसभा के चुनाव में कुछ प्रतिशत वोट भाजपा पर दलितों का गया है। इस बार फिर से भाजपा, बसपा के दलित वोट बैंक में सेंध लगाने में लगी हुई हैं। दलितों को रिझाने के लिए पार्टी ने दो तरह की योजना की है। एक ओर पार्टी के छोटे से लेकर बड़े जाटव और अन्य दलित नेताओं को इस मोर्चे पर लगाया जा रहा है।


इन नेताओं के प्रवास दलित बस्तियों में लगाए जा रहे हैं और सरकार की योजनाओं कैसे उन तक लाभ पहुंचा ये इसका प्रचार-प्रसार करने को कहा जा रहा है। भारतीय जनता पार्टी ने 11 जनवरी से घर-घर संपर्क अभियान शुरू कर दिया है।

पिछले एक दशक से दलित मतों में दूसरी पार्टियों की बढ़ती सेंधमारी का ही नतीजा है कि मायावती को जहां वर्ष 2012 में अपनी सत्ता गंवानी पड़ी वहीं वर्ष 2014 में बसपा लोकसभा में शून्य पर सिमट कर रह गई। पिछली बार सर्वाधिक आरक्षित सीटों पर कब्जा जमाने वाली भाजपा एक बार फिर सत्ता में वापसी के लिए कई बड़े दलित नेताओं को महत्व दे रही है।

बता दें कि यूपी की 403 विधानसभा सीटों में से अनुसूचित जाति के लिए 84 सीटें आरक्षित हैं। वहीं अनुसूचित जनजाति के लिए 2 सीट आरक्षित हैं। मायावती भी इस बार दलितों के वोट बैंक का समीकरण बनाकर अन्य जातियों के उम्मीदवारों को टिकट दे रही है। बसपा का माना है कि इस बार यूपी में चौकाने वाले रिजल्ट होगे।

सपा ने भी प्रदेश की आरिक्षत सीटों पर अरिक्षत वर्ग के उम्मीदवारों को उतारा है। सभी राजनीतिक दल दलितों के वोट पाने के लिये अपने घोषणा पत्र में कई योजनाओं का लाभ देने का वादा कर रहे। सवाल ये है क्या दलित बसपा को छोड़कर अन्य पार्टियों को कितना फायदा देता है इसका पता 10 मार्च को ही चलेगा।

By Bhoodev Bhagalia

जागरूक यूथ न्यूज डिजिटल में सीनियर डिजिटल कंटेंट प्रोड्यूसर है। पत्रकारिता की शुरुआत हिन्दुस्तान अखबार, अमर उजाला, समर इंडिया होते हुए जागरूक यूथ न्यूज में पहुंचा। लगातार कुछ अलग और बेहतर करने के साथ हर दिन कुछ न कुछ सीखने की कोशिश। राजनीति, अपराध और पॉजिटिव खबरों में रुचि।

Related Post