Mon. Oct 3rd, 2022

नई दिल्ली. आलू, केला, गाजर, चुकंदर, पपीता, शकरकंद के चिप्स बनाने का बिजनेस आपकी जेब भर सकता है. यह एक ऐसा बिजनेस है, जिसमें मंदी की संभावनाएं बेहद कम है. इस बिजनेस की सबसे अच्छी बात यह है कि इसका सीजन कभी खत्म नहीं होता.

बाजार में इन वेफर्स की काफी डिमांड है. इसकी एक और अच्छी बात यह है कि इस बिजनेस में आपको ज्यादा कंपीटिशन का सामना भी नहीं करना पड़ेगा, क्योंकि इस सेक्टर में अब तक बड़ी कंपनियां नहीं आई हैं. आप इस बिजनेस में मेहनत करके और अच्छे स्ट्रेटजी का इस्तेमाल कर, इसमें जल्द ही उन्नति कर सकते हैं.

ऐसे कर सकते हैं शुरुआत

इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको सबसे पहले कच्चे माल की जरूरत पड़ेगी. आप फल या सब्जी, जिसके भी वेफर्स बना रहे हैं, उसके साथ मसाले, नमक और खाद्य तेल की जरूरत होगी. वेफर्स बनाने के लिए मशीन की जरूरत पड़ेगी. वहीं फलों और सब्जियों को छीलने, उबालने और उन्हें पतली स्लाइस में काटने के लिए भी मशीन की जरूरत होगी. आपको प्रिंटिंग पाउच की भी एक मशीन लगानी होगी. अगर आप इसे नहीं खरीदना चाहते हैं तो इसे किराए पर भी ले सकते हैं या आप इसे बाहर भी प्रिंट करवा सकते हैं.

ऐसे कमाएं मुनाफे

आपको इस बिजनेस में 100 किलो प्रोडक्ट तैयार करने के लिए कच्चा समान, मसाले और खाद्य तेल सहित अन्य खर्च मिलाकर करीब 5,000 रुपए से 7,000 रुपए तक खर्च करना पड़ेगा. कभी-कभी सब्जियां और फल की कीमत बढ़ती है तो आपका बजट थोड़ा और बढ़ सकता है. वेफर्स की कीमत बाजार में करीब 150 रुपए प्रति किलो है. यानी कि आपको 100 किलो की कीमत 15,000 रुपए तक मिल जाएंगे. जब आप इसमें से 7000 रुपए पूंजी निकलेंगे तो भी आपके पास 8000 रुपए बच जाएंगे.

 

मान लीजिए अगर आप हर दिन 40 से 60 किलो तक वेफर्स बनाते हैं. आपको इसमें से सारे खर्च निकाल कर प्रति किलो 70-100 रुपए तक का मुनाफा मिल जाएगा. ऐसे में आप हर दिन आराम से 2800 रुपए से लेकर 6,000 रुपए कमा सकते हैं. इस तरह से आपको हर महीने लाखों रुपए की कमाई होगी. इन दिनों मुंबई में कई लोग इस वेफर्स की बिजनेस को कर रहे हैं और अपने प्रोडक्ट को देश-विदेश तक सप्लाई कर लाखों रुपए कमा रहे हैं.