Sun. Aug 14th, 2022
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डेस्क। ग्रामीण क्षेत्र के साथ शहरों के आसपास आजकल मुर्गे फार्म के जरीये बिजनेस किया जा रहा है। इस बिजनेस में मुनाफा ज्यादा है। जो हर मौसम में चलने वाला है। इस खबर में आपको एक ऐसी मुर्गे के बारे में बता रहे जिसकी डिमांड ज्याद है। बडे मुर्गे फार्म प्रतिदिन के लाखों कमा रहे है। 

 कड़क नाथ मुर्गे की ज्यादा मांग 

आपने कड़क नाथ मुर्गे का नाम तो सुना ही होगा। समान्य मुर्गों की अपेक्षा इसका रेट अधिक रहता है। महंगा होने के बावजूद भी इसकी डिमांड बहुत अधिक रहती है। बाजार में इसके खरीदारों की कमी नहीं है। यह एक ऐसा बिजनेस है जिसे शुरू करने के लिए बहुत पैसे की जरूरत नहीं होती है। छोटा निवेश करके भी इसमें मोटा मुनाफा कमाया जा सकता है। 

पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी करते है कड़क नाथ मुर्गे का पालन

 भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी भी अपने फॉर्म हाउस में कड़क नाथ मुर्गे का पालन करते हैं। आइए जानते हैं कि इस बिजनेस को शुरू करने का लिए किन बातों का ध्यान रखना होगा। 

100 दिन में बन सकते हैं लखपति 

कड़कनाथ मुर्गे की सबसे बड़ी खासियत है इसको तैयार होने में ज्यादा समय नहीं लगता है। साथ ही इसे घास, रोटी, चावल, गेहूं, दाना, छोटी मछली कुछ भी खिलाया जा सकता है। यानी चारा खरीदने के लिए भी आपको बड़ी पूंजी की आवश्यकता नहीं होगी।

 इसे तैयार होने में भी महज 90 से 100 दिन का ही समय लगता है। यानी अगर ठीक से सुनियोजित ढंग से इसमें निवेश किया जाए तो महज 100 दिन में इससे लखपति बना जा सकता है।

एक मुर्गे की कीमत 7 से 8 सौ रुपए, इन मरीजों के लिए है फायदेमंद 

कड़कनाथ मुर्गे की मांग शहर के बाजारों में खूब है। एक किलो का मुर्गा सात से आठ सौ रुपया में मिलता है। जबकि, अंडे की डिमांड भी काफी है। 25 से 30 रुपए में एक अंडा बिकता है। कड़कनाथ भारत का एकमात्र काला मांस का चिकन है। सफेद मुर्गे के मुकाबले इसमें कोलस्ट्रॉल की मात्रा बेहद कम होती है। अमीनो एसिड का स्तर अधिक होता है। भरपूर मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है। वसा कम होता है। इसलिए यह हार्ट पेशेंट और डायबिटीज मरीजों के लिए फायदेमंद होता है। मुर्गे का मांस, खून, चोंच, अंडे, जुबान और शरीर सबकुछ काला होता है।

छह माह बाद देने लगती हैं अंडे

कड़कनाथ मुर्गियां छह माह में अंडे देने लगती हैं। एक मुर्गी प्रत्येक माह में 10 से 12 अंडे देती हैं। अच्छी बात यह कि काले मुर्गे में रोग होने का डर नहीं रहता है।